सागर / 36 साल तक लकड़ी माफिया से लड़े 6 गांव के लोग; वीरान हो चुकी पहाड़ी पर बसाया 4000 हेक्टेयर का हरा-भरा जंगल

 




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  • मप्र में 68 वर्ग किमी बढ़ गया, लेकिन भोपाल समेत 26 जिलों में जंगल घटा



 



भोपाल/सागर. इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट 2019 की रिपोर्ट हाल में जारी हुई है। इसके मुताबिक पिछले 2 साल में देश में करीब 5000 वर्ग किलोमीटर और मध्यप्रदेश में 68 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र बढ़ा है। मध्यप्रदेश के कई जिले ऐसे हैं, जहां वन क्षेत्र बढ़ा है, लेकिन इसके पीछे स्थानीय लोगों का सालों का संघर्ष व दृढ़ संकल्प छिपा हुआ है।




 




ऐसी ही कहानी है सागर से 15 किमी दूर बसे आमेठ क्षेत्र की। यहीं 4000 हेक्टेयर में एक जंगल फैला हुआ है। इसे छह गांवों ने बसाया है। जंगल बसाने में ग्रामीणों ने 36 साल तक संघर्ष किया। रेंजर लखन सिंह ठाकुर बताते हैं कि लकड़ी माफिया ने पेड़ काटकर पहाड़ियों को वीरान कर दिया था और गांव को बिगड़े वन क्षेत्र की श्रेणी में रख दिया गया था। बदलाव की शुरुआत ग्रामीणों ने ही की। उन्होंने सबसे पहले लकड़ी माफिया को खदेड़ा। इसके बाद वन विभाग ने सभी गांवों में वन समितियां बनाकर हर घर से एक सदस्य को जंगल बसाने की टीम में शामिल किया।


ग्रामीणों ने दिन-रात पहरा दिया और अपराधियों को दबोचकर वन विभाग के हवाले किया। साथ ही वन विभाग की मदद से हर साल यहां लाखों की संख्या में पौधे रोपे गए। समितियों के माध्यम से प्रबंधन और नर्सरी की स्थापना हुई। 36 साल की मेहनत के बाद पहाड़ी पर दोबारा जंगल तैयार हो गया। यहां वन्यजीव भी हैं। इसलिए केंद्र सरकार ने 100 हेक्टेयर में चिड़ियाघर बनाने की स्वीकृति भी दे दी है। 2020 में करीब 112 करोड़ रुपए की लागत से यहां चिड़ियाघर के निर्माण का काम शुरू हो जाएगा।


मप्र में 68 वर्ग किमी बढ़ गया, लेकिन भोपाल समेत 26 जिलों में जंगल घटा
जलवायु परिवर्तन को लेकर यह खबर दिल को सुकून देने वाली है। देश में बीते दो साल में वन क्षेत्र 5188 वर्ग किमी बढ़ गया है। खास बात यह है कि इसमें 1120 वर्ग किमी घना जंगल है। इसके साथ ही देश के भौगोलिक हिस्से में अब वन क्षेत्र का हिस्सा 25 फीसदी हो गया है। दूसरी तरफ, मप्र में भी 68 वर्ग किमी वन क्षेत्र बढ़ा है, लेकिन भोपाल, इंदौर समेत 26 जिलों में यह 410.66 वर्ग किमी घट भी गया है। 


मप्र में 2017 में 77,414 वर्ग किमी में वन क्षेत्र था, जो बढ़कर 77,482 वर्ग किमी हो गया। जबकि भोपाल में दो साल पहले 354 वर्ग किमी में जंगल था, जो अब 328.67 वर्ग किमी हो गया है। इसी अवधि में भोपाल में मॉडरेट और ओपन फॉरेस्ट भी घट गया है। जबकि पन्ना में 75.71 वर्ग किलोमीटर जंगल बढ़ा है, यहां तीनों श्रेणियों में जंगल बढा़ है।